• Andy Tora
    Andy Tora
04

तेरी बाहों का sukoon... 🥵

  • 29 Nov, 2025

आर्यमान और तारा के कमरे में बस खामोशी बची थी। दीवार पर लटकी सुनहरी घड़ी की टिक-टिक उस मौन को और गहरा बना रही थी। तारा ने आँखे बंद कीं — उसके चेहरे पर अब भी मुस्कान थी, जैसे किसी लम्बे सफ़र के बाद सुकून भरी मंज़िल मिली हो। उसने धीरे से आर्यमान का हाथ थामा और बोली, “आर्यन… तुम्हारा दोस्त शिवाय, आया था ना?”आर्यमान ने हल्के से सिर हिलाया। “हाँ, वो अभी यहीं है। मीरा के कमरे में गया है।”

तारा की भौंहें उठीं। “मीरा के कमरे में?” उसने हल्के मज़ाक से कहा, “फिर तो आज वहाँ भी कुछ खास चल रहा होगा।”

Write a comment ...

Andy Tora

Show your support

Pls support my novel guy's

Write a comment ...